सामान्य वर्ग के पशुपालकों के लिए बड़ा तोहफा! अब गाय ही नहीं, भैंस खरीदने पर भी मिलेगी लाखों की सब्सिडी

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देहरादून। उत्तराखंड सरकार ने किसानों और पशुपालकों के लिए बड़ी सौगात दी है। अब प्रदेश के सामान्य वर्ग के पशुपालक भी सरकारी सब्सिडी पर गाय और भैंस खरीद सकेंगे। राज्य मंत्रिमंडल ने पशुपालन विभाग की गौ पालन योजना का दायरा बढ़ाते हुए इसे सामान्य वर्ग तक विस्तार देने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है। इतना ही नहीं, योजना में गाय के साथ-साथ भैंस खरीदने का विकल्प भी शामिल कर दिया गया है। सरकार का मानना है कि इस फैसले से ग्रामीण क्षेत्रों में स्वरोजगार को बढ़ावा मिलेगा, किसानों की आय बढ़ेगी और पलायन रोकने में भी मदद मिलेगी। 

अब तक यह योजना केवल अनुसूचित जाति (एससी) और अनुसूचित जनजाति (एसटी) वर्ग के लाभार्थियों तक सीमित थी। उन्हें सब्सिडी पर गाय उपलब्ध कराई जाती थी। लेकिन नई व्यवस्था के तहत सामान्य वर्ग के पशुपालक भी इस योजना का लाभ उठा सकेंगे। इससे प्रदेश में अधिक से अधिक लोगों को डेयरी व्यवसाय से जोड़ने का रास्ता खुलेगा। सरकार ने योजना में एक और महत्वपूर्ण बदलाव करते हुए गाय और भैंस की यूनिट लागत 40 हजार रुपये से बढ़ाकर 60 हजार रुपये कर दी है। यानी अब सब्सिडी भी बढ़ी हुई लागत के आधार पर मिलेगी। इससे पशुपालकों को बेहतर नस्ल के पशु खरीदने में आर्थिक सहायता मिलेगी और डेयरी उत्पादन को नई गति मिलने की उम्मीद है। नई व्यवस्था के अनुसार एससी और एसटी वर्ग के लाभार्थियों को पहले की तरह 90 प्रतिशत सब्सिडी मिलेगी। यानी 60 हजार रुपये की यूनिट लागत पर सरकार 54 हजार रुपये का अनुदान देगी, जबकि लाभार्थी को केवल 6 हजार रुपये का योगदान करना होगा। वहीं, सामान्य वर्ग के पशुपालकों के लिए सरकार ने 60 प्रतिशत सब्सिडी निर्धारित की है। इसके तहत सरकार 36 हजार रुपये का अनुदान देगी और लाभार्थी को 24 हजार रुपये स्वयं वहन करने होंगे। सरकार का कहना है कि इस सहायता से सामान्य वर्ग के किसान भी पशुपालन को लाभकारी व्यवसाय के रूप में अपनाने के लिए प्रोत्साहित होंगे। पशुपालन विभाग के अनुसार, इस योजना से केवल दूध उत्पादन ही नहीं बढ़ेगा, बल्कि किसानों को जैविक खेती के लिए गोबर और अन्य प्राकृतिक खाद भी उपलब्ध होगी। इससे खेती की लागत कम करने और कृषि उत्पादकता बढ़ाने में भी मदद मिलेगी। ग्रामीण क्षेत्रों में डेयरी आधारित उद्यम विकसित होने से स्थानीय स्तर पर रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे। सरकार का लक्ष्य है कि योजना के पहले ही वर्ष में एससी, एसटी और सामान्य वर्ग के कुल 2,128 पशुपालकों को इसका लाभ दिया जाए। इसके लिए राज्य सरकार करीब 978.12 लाख रुपये खर्च करेगी। अधिकारियों का मानना है कि यह योजना ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने के साथ-साथ युवाओं को गांवों में ही रोजगार उपलब्ध कराने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम साबित होगी। प्रदेश सरकार का कहना है कि किसानों की आय दोगुनी करने, डेयरी क्षेत्र को मजबूत बनाने और स्वरोजगार को बढ़ावा देने के उद्देश्य से यह निर्णय लिया गया है। योजना के विस्तार से अब अधिक संख्या में पशुपालक आधुनिक डेयरी व्यवसाय से जुड़ सकेंगे, जिससे ग्रामीण विकास को नई रफ्तार मिलने की उम्मीद है।