उत्तराखंड के सीमांत जिलों में रिवर्स पलायन की उम्मीद, साहसिक पर्यटन से आत्मनिर्भर बन रहे युवा

Blog
 Image

उत्तराखंड अब देश ही नहीं, बल्कि दुनिया के एडवेंचर टूरिज्म (साहसिक पर्यटन) के सबसे बड़े केंद्र के रूप में उभरने जा रहा है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के निर्देशों पर पर्यटन विभाग ने राज्य के कम चर्चित और सीमांत क्षेत्रों को वैश्विक मानचित्र पर स्थापित करने के लिए एक मेगा प्लान तैयार किया है। इसके तहत गढ़वाल और कुमाऊं के बाद अब जौनसार-बावर क्षेत्र की 'टौंस नदी' में अंतरराष्ट्रीय स्तर के वाटर स्पोर्ट्स आयोजन की तैयारी शुरू हो गई है। इसके साथ ही, आगामी दिसंबर में कुमाऊं मंडल में 'एडवेंचर टूर ऑपरेटर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया' के सैकड़ों दिग्गजों का एक बड़ा राष्ट्रीय सम्मेलन भी होने जा रहा है।

पर्यटन सचिव धीराज सिंह गर्ब्याल ने बताया कि विदेशी विशेषज्ञों की टीम के साथ मिलकर टौंस नदी का प्रारंभिक सर्वेक्षण (रेकी) पूरा कर लिया गया है, जिसमें इसे विश्वस्तरीय एडवेंचर स्पोर्ट्स के लिए सर्वोत्तम पाया गया है। यमुना की सबसे बड़ी सहायक नदी 'टौंस' उत्तराखंड की सबसे वाइल्ड और चुनौतीपूर्ण नदियों में से एक है। उत्तरकाशी के उद्गम स्थल से लेकर जौनसार-बावर तक इसका वेग गंगा और यमुना से भी कहीं अधिक तीव्र है। सर्वे के अनुसार, इस नदी में बनने वाले रैपिड्स 'ग्रेड-4' और 'ग्रेड-5' से भी ऊपर के हैं। तकनीकी रूप से बेहद चुनौतीपूर्ण होने के कारण यह सामान्य पर्यटकों के बजाय एडवांस स्किल वाले वैश्विक प्रोफेशनल राफ्टर्स और कयाकर्स के लिए एक आदर्श मंच बनेगी। यहाँ अंतरराष्ट्रीय स्तर की राफ्टिंग, कयाकिंग और कैनोइंग प्रतियोगिताएं आयोजित की जाएंगी। प्रदेश की साहसिक संभावनाओं को वैश्विक बाजार से जोड़ने के लिए दिसंबर में कुमाऊं मंडल में एक बड़ा सम्मेलन प्रस्तावित है। इसमें देश भर से एटीओएआई के विशेषज्ञ, ट्रेकिंग, माउंटेनियरिंग और इनबाउंड टूरिज्म से जुड़े ऑपरेटर्स हिस्सा लेंगे। सम्मेलन के दौरान विशेषज्ञों को गढ़वाल और कुमाऊं दोनों मंडलों का भ्रमण कराया जाएगा, ताकि वे यहाँ के प्राकृतिक संसाधनों का प्रत्यक्ष अनुभव ले सकें। पर्यटन सचिव ने बताया कि पिछले 6 महीनों में आदि कैलाश (नवंबर) और नीति घाटी (मई 2026) में आयोजित दो हाई-एल्टीट्यूड अल्ट्रा मैराथन बेहद सफल रहे हैं। वर्ष 1962 के बाद पहली बार चीन सीमा से लगे क्षेत्रों में ऐसी हलचल दिखी है। नीति घाटी में आयोजन से पहले जहां महज 50 बेड की क्षमता थी, वहीं आयोजन के दौरान यह बढ़कर 500 बेड तक पहुंच गई। स्थानीय लोगों ने अपने घरों को होमस्टे में बदला, जिससे उनकी आजीविका को भारी मजबूती मिली। इसी सफल मॉडल के आधार पर अब सरकार टौंस नदी और अन्य अनछुए दुर्गम क्षेत्रों में बड़े अंतरराष्ट्रीय इवेंट आयोजित करने जा रही है, ताकि उत्तराखंड को देश की 'एडवेंचर टूरिज्म राजधानी' बनाया जा सके।