उत्तराखंड सीएम हेल्पलाइन पर अब तक 20 हजार से अधिक शिकायतों का पूरी तरह किया गया निस्तारण

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देहरादून। उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने जनसमस्याओं के निस्तारण में हीलाहवाली करने वाले अफसरों के खिलाफ कड़ा रुख अपनाया है। सचिवालय में आयोजित 'मुख्यमंत्री हेल्पलाइन 1905' की उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक के दौरान सीएम धामी ने विशेषकर पेयजल विभाग और जल जीवन मिशन से जुड़ी शिकायतों की भरमार पर गहरा असंतोष और नाराजगी जताई। उन्होंने संबंधित विभागीय अधिकारियों को दोटूक चेतावनी देते हुए निर्देश दिया कि एक हफ्ते (7 दिन) के भीतर सभी लंबित शिकायतों का प्रभावी और गुणवत्तापूर्ण निस्तारण सुनिश्चित किया जाए।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने मुख्यमंत्री हेल्पलाइन-1905 पर लगातार मिल रही जन शिकायतों, विशेषकर जल जीवन मिशन और पेयजल विभाग से जुड़े मामलों पर कड़ा रुख अपनाया है। सचिवालय में आयोजित उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक में मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि जल जीवन मिशन से संबंधित सभी लंबित शिकायतों का एक सप्ताह के भीतर प्रभावी निस्तारण सुनिश्चित किया जाए। उन्होंने चेतावनी दी कि शिकायतों के समाधान में लापरवाही या अनावश्यक देरी करने वाले अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। बैठक के दौरान मुख्यमंत्री ने कहा कि मुख्यमंत्री हेल्पलाइन-1905 प्रदेशवासियों की समस्याओं के त्वरित समाधान का सबसे प्रभावी मंच है। यदि शिकायतों के निस्तारण में किसी भी स्तर पर उदासीनता बरती गई तो संबंधित अधिकारी की जवाबदेही तय की जाएगी। उन्होंने कहा कि सरकार का उद्देश्य केवल शिकायत दर्ज करना नहीं, बल्कि उसका गुणवत्तापूर्ण और संतोषजनक समाधान सुनिश्चित करना है। मुख्यमंत्री ने समीक्षा के दौरान पाया कि पेयजल विभाग और जल जीवन मिशन से जुड़ी शिकायतों की संख्या अपेक्षाकृत अधिक है। इस पर उन्होंने नाराजगी व्यक्त करते हुए विभागीय अधिकारियों को निर्देश दिए कि सभी लंबित मामलों का सात दिनों के भीतर समाधान किया जाए। उन्होंने दो टूक कहा कि जनता को मूलभूत सुविधाओं के लिए भटकना स्वीकार नहीं किया जाएगा और पेयजल जैसी आवश्यक सेवा में लापरवाही किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं होगी।  मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि मुख्यमंत्री हेल्पलाइन पर जिन अधिकारियों की शिकायतों के निस्तारण की स्थिति शून्य प्रतिशत है, उन्हें विभागाध्यक्ष तत्काल कारण बताओ नोटिस जारी करें। यदि उनका जवाब संतोषजनक नहीं पाया जाता है तो उनके खिलाफ नियमानुसार अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाए। उन्होंने यह भी कहा कि जो शिकायतें निर्धारित समय सीमा में हल नहीं हो पा रही हैं, उनकी नियमित समीक्षा विभागाध्यक्ष और जिलाधिकारी स्तर पर की जाए। साथ ही, स्पेशल क्लोज, डिमांड और सुझाव जैसी श्रेणियों में भेजी गई शिकायतों का भी गंभीरता से परीक्षण किया जाए, ताकि किसी वास्तविक शिकायत को तकनीकी आधार पर बंद न किया जा सके। मुख्यमंत्री धामी ने जन समस्याओं के त्वरित समाधान के लिए नया निर्देश जारी करते हुए कहा कि हर सोमवार जिला स्तर पर जिलाधिकारी, मंडल स्तर पर मंडलायुक्त और शासन स्तर पर सभी सचिव 'समाधान दिवस' आयोजित करेंगे। इस दौरान जनता की शिकायतों की सुनवाई कर मौके पर ही समाधान सुनिश्चित करने का प्रयास किया जाएगा। उन्होंने कहा कि समाधान दिवस को जनसेवा का प्रभावी मंच बनाया जाए और इसकी नियमित मॉनिटरिंग भी की जाए। बैठक में मुख्यमंत्री ने आपदा प्रबंधन, लोक निर्माण, पर्यटन, स्वास्थ्य और पुलिस विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों को चारधाम यात्रा मार्गों का स्थलीय निरीक्षण कर व्यवस्थाओं को और मजबूत बनाने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि श्रद्धालुओं की सुरक्षा और सुविधा सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए। इसके अलावा भूमि संबंधी विवादों के शीघ्र निस्तारण, अधिकारियों द्वारा अपने प्रारंभिक कार्यस्थलों पर किए गए नवाचारों की 50 दिन के भीतर रिपोर्ट प्रस्तुत करने और सेवानिवृत्त कर्मचारियों को पहले ही महीने से पेंशन उपलब्ध कराने के भी निर्देश दिए। बैठक में सचिव डॉ. पंकज पांडेय ने बताया कि 18 अप्रैल से 28 जुलाई 2026 के बीच मुख्यमंत्री हेल्पलाइन-1905 पर 67,843 शिकायतें प्राप्त हुईं। इनमें 20,461 शिकायतों का पूर्ण निस्तारण, 31,363 का आंशिक निस्तारण, 7,404 शिकायतें प्रक्रियाधीन, 4,061 लंबित तथा 3,738 शिकायतें स्पेशल क्लोज श्रेणी में हैं। उन्होंने बताया कि स्पेशल क्लोज की दर घटकर 5.5 प्रतिशत रह गई है, जो पूर्व की तुलना में बेहतर स्थिति को दर्शाती है। मुख्यमंत्री ने सभी सचिवों और जिलाधिकारियों को निर्देश दिए कि अगली समीक्षा बैठक से पहले अपने-अपने विभागों की व्यापक समीक्षा करें। उन्होंने स्पष्ट किया कि अगली बैठक में केवल शिकायतों की संख्या नहीं, बल्कि गुणवत्तापूर्ण निस्तारण, शिकायतकर्ता की संतुष्टि और विभागीय जवाबदेही के आधार पर अधिकारियों का मूल्यांकन किया जाएगा। मुख्यमंत्री का यह सख्त रुख साफ संकेत देता है कि सरकार अब जन शिकायतों के निस्तारण में किसी भी तरह की ढिलाई स्वीकार करने के मूड में नहीं है।