Friday, July 19, 2024
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उत्तराखंड: नदियों नालों ने दिखाया विकराल रूप, पहली ही बारिश ने विभागीय अधिकारियों की कार्यशैली पर खड़े किए कई सवाल

मानसून को देखते हुए प्रशासन भले ही अपनी व्यवस्थाओं को चाक चौबंद बताता हो लेकिन पहली ही बारिश ने अधिकारियों के कार्यशैली पर सवाल खड़े कर दिए हैं… बढ़ते खतरे को देखते हुए चिंतित जनप्रतिनि भी अब विभागीय अधिकारियों पर आरोप लगाने से नही चूक रहें। 3 दिन से लगातार बरसता आसमान का पानी ने अधिकारियों के दावों को पानी पानी कर तो कर दिया साथ ही बारिश ने आम जन जीवन को अस्त व्यस्त कर दिया है।जगह-जगह नदी नालों का रोद्र रूप से मौत का तांडव भी देखने को मिल रहा है

 

उत्तराखंड में पहले गर्मी की मार झेल चुकी आम जनता अब भारी बारिश की मार झेल रही है। लगातार हो रही बारिश से आम जनता को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। और नदी नाले अपना विकराल रूप दिखा रहे हैं अधिकारी भले ही आपदा को लेकर अपनी व्यवस्थाओ को दुरुस्त बताने का दावा करते हो लेकिन सच्चाई इन दावो से कोसो दूर नजर आती हैं। आसमान से कहर बनकर बरस रही बारिश की बजह से तुमड़िया डैम को पानी सप्लाई करने वाली नदी का पानी इतना ओवर हो गया हैं कि किसानों के खेतों में भर गया है ओर तुमड़िया डैम की दीवार में भी पानी ने जगह जगह होल खोल दिये हैं गनीमत रही कि पानी का फ्लो कम होने से डैम की दीवार को ज्यादा नुकसान नही हुआ है अगर पानी का स्तर कम नही होता तो लगभग बीस हजार की आवादी प्रभावित हो सकती थी ग्रामीण अब इस डैम की दीवार को जल्द दुरुस्त करने की मांग कर रहे हैं। इस खतरे को देखते हुए आम जनता भय के माहौल में जी रही है। अगर ये बारिस का कहर ऐसे ही जारी रहा तो वो दिन दूर नही जब नदी का पानी ग्रामीणों के घरों में घुस सकता है। ग्रामीणों का जानमाल का भारी नुकसान हो सकता है।

 

हर साल बारिश की बजह से जानमाल का भारी नुकसान होता हैं आपदा प्रबंधन से जुड़े अधिकारी व्यवस्थाओ के दुरुस्त होने के लाख दावे करते हो लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और ही होती हैं। जैसे ही बारिश शुरू होती हैं तो आपदा प्रबंधन के सारे दावे खोखले नजर आते है। अब देखना होगा कि बीस हजार की आवादी पर जो संकट मंडरा रहा है उस खतरे को रोकने के लिए प्रशासन क्या कारगर कदम उठता हैं।

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