उत्तराखंड में हैट्रिक की तैयारी: भाजपा के दो बड़े कार्यक्रमों से विपक्ष के खेमे में मची हलचल, चुनावी बिसात बिछी

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उत्तराखंड में वर्ष 2027 के विधानसभा चुनाव को लेकर राजनीतिक हलचल धीरे-धीरे तेज होने लगी है। राज्य में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व वाली सरकार 23 मार्च 2026 को अपने दूसरे कार्यकाल के चार वर्ष पूरे करने जा रही है। इस मौके को राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण संदेश में बदलने की तैयारी भारतीय जनता पार्टी ने शुरू कर दी है। पार्टी ने दो बड़े कार्यक्रमों के जरिए अपनी चुनावी रणनीति का संकेत दे दिया है, जिसमें केंद्र सरकार के दो दिग्गज नेता राज्य में शक्ति प्रदर्शन करते नजर आएंगे। भाजपा की ओर से पहला बड़ा कार्यक्रम 7 मार्च को हरिद्वार में आयोजित किया जाएगा, जिसमें केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह मुख्य अतिथि के रूप में शामिल होंगे। यह कार्यक्रम हरिद्वार के बैरागी कैंप क्षेत्र में प्रस्तावित है। वहीं दूसरा बड़ा आयोजन 22 मार्च को श्रीनगर गढ़वाल में होगा, जहां केंद्रीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह कार्यकर्ताओं और जनता को संबोधित करेंगे। इन दोनों कार्यक्रमों को भाजपा की ओर से 2027 विधानसभा चुनाव के लिए चुनावी शंखनाद के रूप में देखा जा रहा है। हरिद्वार में होने वाले कार्यक्रम के जरिए भाजपा सरकार अपने चार वर्षों की उपलब्धियों को जनता के सामने रखने की तैयारी में है। पार्टी सूत्रों के अनुसार, कार्यक्रम में राज्य सरकार की प्रमुख योजनाओं और उपलब्धियों को प्रदर्शित किया जाएगा। साथ ही केंद्र सरकार की विभिन्न योजनाओं के तहत राज्य को मिलने वाली नई परियोजनाओं और सौगातों की घोषणा भी संभव मानी जा रही है। इसके लिए प्रदेशभर से बड़ी संख्या में पार्टी कार्यकर्ताओं, जनप्रतिनिधियों और समर्थकों को जुटाने की तैयारी चल रही है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि अमित शाह का यह दौरा केवल सरकारी उपलब्धियों के प्रचार तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि इसके जरिए भाजपा संगठन को आगामी चुनावों के लिए सक्रिय करने का प्रयास भी किया जाएगा। पार्टी कार्यकर्ताओं में उत्साह भरने और संगठनात्मक मजबूती का संदेश देने की रणनीति भी इस कार्यक्रम के पीछे मानी जा रही है।

धामी सरकार के चार वर्ष पूरे होने के अवसर पर दूसरा बड़ा कार्यक्रम 22 मार्च को श्रीनगर गढ़वाल में प्रस्तावित है। इस कार्यक्रम में केंद्रीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह मुख्य अतिथि के रूप में मौजूद रहेंगे। भाजपा का मानना है कि इस आयोजन के माध्यम से सरकार के चार वर्षों के विकास कार्यों का विस्तृत रोडमैप प्रस्तुत किया जाएगा और आगामी योजनाओं की झलक भी दी जाएगी। भाजपा के प्रदेश प्रवक्ता नवीन ठाकुर के अनुसार धामी सरकार ने अपने चार साल के कार्यकाल में कई बड़े और साहसिक फैसले लिए हैं, जिनका असर राज्य की राजनीति और प्रशासनिक व्यवस्था पर स्पष्ट रूप से देखा जा सकता है। उन्होंने कहा कि श्रीनगर गढ़वाल का कार्यक्रम ऐतिहासिक होगा और यह केवल उपलब्धियों का उत्सव नहीं बल्कि उत्तराखंड के विकास के अगले चरण की दिशा भी तय करेगा। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने 23 मार्च 2022 को दूसरी बार मुख्यमंत्री पद की शपथ ली थी। इसके बाद से उनकी सरकार ने कई अहम फैसले लिए। इनमें समान नागरिक संहिता लागू करने की दिशा में पहल, सख्त नकल विरोधी कानून, धर्मांतरण विरोधी कानून को और मजबूत बनाना तथा भू-कानून को लेकर सख्त रुख जैसे फैसले शामिल हैं। इसके अलावा राज्य में निवेश को बढ़ावा देने के लिए ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट का आयोजन, सड़क, स्वास्थ्य और शिक्षा के क्षेत्र में बुनियादी ढांचे के विकास पर भी जोर दिया गया है। राजनीतिक दृष्टि से भी इन कार्यक्रमों को बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। हरिद्वार जैसे धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व वाले शहर में कार्यक्रम आयोजित कर भाजपा धार्मिक और सांस्कृतिक पहचान का संदेश देना चाहती है, जबकि श्रीनगर गढ़वाल में कार्यक्रम आयोजित कर पहाड़ के विकास और क्षेत्रीय संतुलन का संकेत देने की रणनीति भी मानी जा रही है। उधर, जहां भाजपा सरकार अपनी उपलब्धियों को जनता के सामने रखकर आगामी चुनावों की तैयारी में जुटी है, वहीं विपक्ष भी सरकार की नीतियों और फैसलों को लेकर सवाल उठाने की रणनीति बना रहा है। ऐसे में आने वाले समय में उत्तराखंड की राजनीति और अधिक गर्माने के आसार हैं। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि अमित शाह और राजनाथ सिंह के प्रस्तावित दौरे यह संकेत देते हैं कि भाजपा का शीर्ष नेतृत्व उत्तराखंड को लेकर गंभीर है और 2027 में लगातार तीसरी बार सत्ता में वापसी के लक्ष्य के साथ अभी से सियासी रणनीति तैयार की जा रही है। अब देखना यह होगा कि इन आयोजनों का जनता के बीच कितना असर पड़ता है और आने वाले चुनावी समीकरणों पर इसका क्या प्रभाव दिखाई देता है।