नई साइबर सुरक्षा गाइडलाइन से छात्रों की गोपनीयता सुरक्षा को मिलेगा बड़ा मजबूती का आधार

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देहरादून। डिजिटल युग में डेटा चोरी और ऑनलाइन धोखाधड़ी के बढ़ते खतरों को देखते हुए उत्तराखंड सरकार ने एक बड़ा कदम उठाया है। प्रदेश के सभी राज्य विश्वविद्यालयों में अब छात्र-छात्राओं की व्यक्तिगत और शैक्षणिक जानकारी को सुरक्षित रखने के लिए साइबर सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए जाएंगे। उच्च शिक्षा मंत्री डॉ. धन सिंह रावत ने सभी कुलपतियों को दोटूक निर्देश दिए हैं कि विश्वविद्यालयों के वेब अनुप्रयोगों और पोर्टल्स को साइबर खतरों से बचाने के लिए तत्काल प्रभावी कदम उठाए जाएं।

उच्च शिक्षा मंत्री ने अपने शासकीय आवास पर राज्य विश्वविद्यालयों की एक महत्वपूर्ण समीक्षा बैठक के दौरान यह निर्देश जारी किए। उन्होंने साफ कहा कि वर्तमान समय में डिजिटल जानकारियों की सुरक्षा करना एक बेहद संवेदनशील और बड़ी चुनौती है, जिससे निपटने के लिए सभी विश्वविद्यालयों को अपने स्तर पर डिजिटल सुरक्षा का एक मजबूत सुरक्षा कवच तैयार करना होगा। बैठक के दौरान डॉ. धन सिंह रावत ने भारत सरकार के डिजिटल पर्सनल डेटा प्रोटेक्शन अधिनियम (DPDP) का सख्ती से पालन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। उन्होंने बताया कि केंद्र सरकार ने वर्ष 2025 में इस ऐतिहासिक डीपीडीपी अधिनियम को देश भर में लागू किया है। यह अधिनियम विशेष रूप से नागरिकों की साइबर सुरक्षा, डेटा गोपनीयता (प्राइवेसी) बनाए रखने और ऑनलाइन वित्तीय धोखाधड़ी को रोकने के लिए बनाया गया है। इस कानून के तहत अब राज्य के विश्वविद्यालयों को भी जवाबदेह बनना होगा और किसी भी स्तर पर छात्रों का डेटा लीक होने पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी। विश्वविद्यालयों को साइबर धोखाधड़ी से बचाने और उनके डिजिटल इन्फ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करने के लिए बुलाई गई इस उच्च स्तरीय बैठक में कई शीर्ष अधिकारी और शिक्षाविद मौजूद रहे। बैठक में मुख्य रूप से उच्च शिक्षा सचिव बी.वी.आर.सी. पुरुषोत्तम, राज्यपाल के सचिव रविनाथ रामन, कुमाऊं विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. डीएस रावत, श्रीदेव सुमन विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. एनके जोशी और सोबन सिंह जीना विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. एसपीएस बिष्ट ने हिस्सा लिया। इनके अलावा उत्तराखंड संस्कृत विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. रमाकांत पाण्डेय, तकनीकी विश्वविद्यालय की कुलपति प्रो. तृप्ता ठाकुर, उच्च शिक्षा के अपर सचिव मनुज गोयल और उच्च शिक्षा निदेशक डॉ. वीएन खाली सहित कई वरिष्ठ अधिकारियों ने भी साइबर सुरक्षा के इस नए खाके को लागू करने पर अपनी सहमति और रणनीतियां साझा कीं। सरकार के इस कदम से अब विश्वविद्यालयों में पढ़ने वाले लाखों छात्र-छात्राओं का डेटा पूरी तरह सुरक्षित होने की उम्मीद है।