Saturday, July 20, 2024
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तिरुपति बालाजी मंदिर ट्रस्ट की तर्ज पर केदारनाथ धाम में व्यवस्थाएं बनाये जाने के विरोध में उतरे पुरोहित

रुद्रप्रयाग। तिरुपति बालाजी मंदिर की तर्ज पर केदारनाथ धाम में व्यवस्थाएं बनाने की कवायद की जा रही है। इसके लिए बदरी केदार मंदिर समिति और तिरुमला तिरुपति देवस्थानम के बीच एमओयू साइन होने जा रहा है, लेकिन तीर्थ पुरोहितों ने अभी से विरोध शुरू कर दिया है। तीर्थ पुरोहितों का साफतौर कहना है कि देवास्थानम बोर्ड की तरह तिरुपति बालाजी एक्ट का पुरजोर विरोध किया जाएगा।

बद्री-केदार मंदिर समिति और तिरूपति बालाजी के बीच होने वाले एमओयू से तीर्थ पुरोहित आक्रोशित नज़र आ रहे हैं। तीर्थ पुरोहितों ने कहा- तिरूपति बालाजी मंदिर और केदारनाथ धाम में जमीन आसमान का अंतर है। पहले सरकार केदारनाथ मंदिर के पीछे हो रहे हिमस्खलन का समाधान करें। साथ ही कहा- केदारनाथ धाम में चल रहे पुनर्निर्माण कार्य, भविष्य के लिए कोई बड़ा खतरा साबित हो सकता है।

केदारनाथ के तीर्थ पुरोहितों ने साफ शब्दों में कहा कि जिस तरह पहले उत्तराखंड चारधाम देवस्थानम प्रबंधन बोर्ड का विरोध किया गया, ठीक उसी तरह तिरुपति बालाजी ट्रस्ट की व्यवस्थाओं का विरोध भी किया जाएगा। केदारनाथ के वरिष्ठ तीर्थ पुरोहित संतोष त्रिवेदी कहा कि तिरुपति बालाजी का एक्ट केदारनाथ धाम की यात्रा व्यवस्थाओं में लागू किया जाना, सही नहीं है। तिरुपति और केदारनाथ धाम में जमीन आसमान का अंतर है। तिरुपति का एक्ट केदारनाथ से मेल नहीं खाएगा। इसका देवस्थानम बोर्ड की भांति विरोध किया जाएगा.उन्होंने कहा कि केदारनाथ धाम के पीछे हिमस्खलन हो रहा है। इस पर सरकार और काबीना मंत्रियों का कोई ध्यान नहीं है। पर्यटन मंत्री हर बार एक नई स्कीम लेकर आ जाते हैं। तीर्थ पुरोहितों ने कहा कि आपदा के बाद से केदारनाथ धाम में पुनर्निर्माण कार्य किए जा रहे हैं, लेकिन इन पुनर्निर्माण कार्यों के बाद से केदारनाथ धाम का अस्तित्व खतरे में नजर आ रहा है। किसी भी कार्य को करने से पहले कोई भी विचार-विमर्श तीर्थ पुरोहितों के साथ नहीं किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि बिना सहमति से कोई भी कार्य करना, विनाशकारी साबित हो सकता है।

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