राज्य सरकार की तीर्थयात्रियों से अपील: भारी बारिश की चेतावनी के दौरान अनावश्यक यात्रा न करें

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देहरादून। उत्तराखंड में मानसून ने एक बार फिर विकराल रूप धारण कर लिया है। बीते 24 घंटों में हुई मूसलाधार बारिश ने पहाड़ से लेकर मैदान तक जनजीवन अस्त-व्यस्त कर दिया है। राजधानी देहरादून के मालदेवता क्षेत्र में सर्वाधिक 233 मिमी बारिश दर्ज की गई, जबकि देहरादून शहर, मसूरी, जौलीग्रांट और उखीमठ समेत कई इलाकों में झमाझम बारिश हुई। लगातार बारिश और भूस्खलन के खतरे को देखते हुए प्रशासन ने एहतियातन चारधाम यात्रा को दो दिनों के लिए अस्थायी रूप से स्थगित कर दिया है। प्रदेश के कई हिस्सों में बाढ़ जैसे हालात बन गए हैं, जबकि चार जिलों में स्कूल भी बंद कर दिए गए हैं।

गढ़वाल मंडल आयुक्त ने बताया कि केदारनाथ, बदरीनाथ, गंगोत्री और यमुनोत्री यात्रा मार्गों पर कई स्थानों पर भूस्खलन और मलबा आने से रास्ते बाधित हो गए हैं। मौसम विभाग के ऑरेंज अलर्ट और यात्रियों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए आज और कल चारधाम यात्रा पर रोक लगाने का निर्णय लिया गया है। मौसम सामान्य होने और सड़कें सुरक्षित होने के बाद ही यात्रा दोबारा शुरू की जाएगी। लगातार बारिश से केदारनाथ, बदरीनाथ और यमुनोत्री हाईवे कई स्थानों पर बंद हो गए हैं। चमोली में कंचन गंगा नाले के पास बदरीनाथ हाईवे मलबा आने से अवरुद्ध हो गया, जबकि उत्तरकाशी जिले में यमुनोत्री हाईवे और जानकीचट्टी-यमुनोत्री पैदल मार्ग को भारी नुकसान पहुंचा है। राम मंदिर के पास यमुना नदी का जलस्तर बढ़ने से पैदल मार्ग का करीब 30 मीटर हिस्सा धंस गया, जिससे श्रद्धालुओं की आवाजाही पूरी तरह बंद हो गई। उत्तरकाशी के पालीगाड़ क्षेत्र में हाईवे पर चट्टानी पत्थर गिरने से यमुनोत्री से लौट रहे दो कांवड़ यात्री घायल हो गए। उन्हें प्राथमिक उपचार के बाद हायर सेंटर रेफर किया गया है। प्रशासन ने क्षेत्र में राहत एवं बचाव कार्य तेज कर दिया है और अन्य यात्रियों को सुरक्षित स्थानों पर रोका गया है। देहरादून में भी बारिश ने भारी तबाही मचाई। नंदा की चौकी के पास लगभग 16 करोड़ रुपये की लागत से बना नया पुल पहली ही मानसूनी बारिश नहीं झेल सका। पुल की एप्रोच रोड का बड़ा हिस्सा धंस गया, जिससे सड़क पर गहरा गड्ढा बन गया और वाहनों की आवाजाही पूरी तरह रोकनी पड़ी। हाल ही में बने इस पुल के क्षतिग्रस्त होने से निर्माण गुणवत्ता पर गंभीर सवाल उठने लगे हैं। राजधानी के रेंजर्स ग्राउंड, सालावाला, डोईवाला और भानियावाला क्षेत्रों में जलभराव से लोगों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा। बरसाती खालों के उफान पर आने से कई रिहायशी इलाकों में पानी भर गया। वहीं, सहस्रधारा क्षेत्र में पुस्ता टूटने, पांच से छह स्थानों पर पेड़ गिरने और दो मकानों के आंशिक रूप से क्षतिग्रस्त होने की घटनाएं भी सामने आई हैं। मालदेवता और सौड़ा सरोली क्षेत्रों में सड़कों पर मलबा आने से यातायात प्रभावित रहा। बारिश का असर अन्य जिलों में भी देखने को मिला। चमोली जिले में 21 ग्रामीण सड़कें बंद हो गई हैं, जबकि टिहरी में नौ ग्रामीण मार्ग भूस्खलन और मलबे के कारण बाधित हैं। कई गांवों का संपर्क मुख्य मार्गों से टूट गया है। प्रशासन और लोक निर्माण विभाग की टीमें जेसीबी मशीनों की मदद से सड़कें खोलने में जुटी हैं। मौसम विज्ञान केंद्र ने प्रदेश के कई जिलों में भारी से बहुत भारी बारिश, आकाशीय बिजली और तेज गर्जना का ऑरेंज अलर्ट जारी किया है। प्रशासन ने लोगों से नदी-नालों और भूस्खलन संभावित क्षेत्रों से दूर रहने, अनावश्यक यात्रा से बचने तथा केवल आधिकारिक मौसम बुलेटिन और प्रशासनिक निर्देशों का पालन करने की अपील की है। जिलाधिकारी आशीष चौहान समेत वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारियों ने प्रभावित क्षेत्रों का निरीक्षण कर राहत एवं बचाव कार्यों की समीक्षा की। राज्य सरकार ने सभी जिलों को हाई अलर्ट पर रखते हुए आपदा प्रबंधन, पुलिस, एनडीआरएफ और संबंधित विभागों को 24 घंटे सतर्क रहने के निर्देश दिए हैं। फिलहाल उत्तराखंड में मौसम का मिजाज अगले दो दिनों तक और बिगड़ने की आशंका है, ऐसे में प्रशासन पूरी तरह अलर्ट मोड पर है।