चंपावत। उत्तराखंड के प्रशासनिक इतिहास में शनिवार का दिन एक दूरगामी और स्वर्णिम बदलाव के रूप में दर्ज हो गया। भारत-नेपाल अंतरराष्ट्रीय सीमा पर स्थित चंपावत जिले के बनबसा (एनएचपीसी परिसर) में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की अध्यक्षता में राज्य मंत्रिमंडल की पहली ऐतिहासिक बैठक संपन्न हुई। राजधानी देहरादून के पारंपरिक सचिवालय हॉल की चारदीवारी से बाहर निकलकर देश के सीमांत क्षेत्र में कैबिनेट का जुटना केवल एक प्रतीकात्मक कदम नहीं, बल्कि 'सचिवालय से सीमांत तक' जन-आकांक्षाओं को शासन के केंद्र में लाने की एक दृढ राजनीतिक इच्छाशक्ति का परिचायक है।
प्रदेश में शासन को देहरादून से निकालकर दूरस्थ और सीमांत क्षेत्रों तक पहुंचाने की दिशा में धामी सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। भारत-नेपाल सीमा से सटे चंपावत जिले के बनबसा स्थित एनएचपीसी परिसर में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की अध्यक्षता में राज्य मंत्रिमंडल की बैठक हुई। चंपावत जिले में पहली बार आयोजित कैबिनेट बैठक में कई महत्वपूर्ण प्रस्तावों पर मुहर लगी। युवाओं, किसानों और कुक्कुट पालकों से लेकर वन भूमि, स्थानीय निकाय, एयरपोर्ट, कर्मचारियों और प्रशासनिक व्यवस्था से जुड़े विषयों पर सरकार ने फैसले किए। बैठक की सबसे बड़ी बात यह रही कि मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि अब कैबिनेट बैठकें केवल देहरादून तक सीमित नहीं रहेंगी। प्रदेश के अलग-अलग जिलों में भी मंत्रिमंडल की बैठकें आयोजित की जाएंगी। सरकार का तर्क है कि इससे स्थानीय समस्याओं, क्षेत्रीय प्राथमिकताओं और विकास की जरूरतों को सीधे शासन के सामने रखने का अवसर मिलेगा। बनबसा कैबिनेट में युवाओं से जुड़े विषयों के साथ विभिन्न विभागों की प्रशासनिक व्यवस्था को लेकर भी निर्णय लिए गए। राज्य अधीन सेवाओं में समूह ‘ग’ के पदों पर आरक्षण प्रक्रिया से संबंधित संशोधन नियमावली-2026 को मंजूरी दी गई। इसके अलावा उत्तराखंड लोक सेवा आयोग के कृत्यों के परिसीमन से जुड़े संशोधन विनियम को भी मंजूरी मिली। इसके तहत जिला युवा कल्याण एवं प्रांतीय रक्षक दल अधिकारी के पद को लोक सेवा आयोग के परिशिष्ट से बाहर किया जाएगा। पशुपालन, डेयरी और मत्स्य पालन विभागों में बेहतर समन्वय के लिए महानिदेशक का नया पद सृजित करने का फैसला भी लिया गया। सरकार का कहना है कि इससे योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन, निगरानी और केंद्र एवं राज्य की योजनाओं के बेहतर संचालन में मदद मिलेगी। कुक्कुट आहार सब्सिडी योजना में भी बदलाव किया गया है। मंत्रिमंडल ने लाभार्थियों को सब्सिडी का भुगतान मौजूदा सीबीडीसी/ई-रूपी आधारित व्यवस्था के स्थान पर आधार सीडेड या लिंक्ड बैंक खाते में सीधे डीबीटी के माध्यम से किए जाने को मंजूरी दी। इससे लाभार्थियों तक सब्सिडी पहुंचाने की प्रक्रिया को बैंक खाते से सीधे जोड़ने का रास्ता साफ होगा। ग्रीनफील्ड एयरपोर्ट पंतनगर के विस्तारीकरण से जुड़े कार्यों के लिए उत्तराखंड ट्रेड एंड टूरिज्म डेवलपमेंट कॉरपोरेशन लिमिटेड को 66.2916 करोड़ रुपये की अवशेष धनराशि जारी करने की मंजूरी दी गई। यह राशि निगम की कार्ययोजना के अनुसार नवनिर्माण और अन्य निर्धारित कार्यों पर खर्च की जाएगी।संपत्ति के क्रय-विक्रय से जुड़े लेन-देन में क्रेता, विक्रेता और अन्य संबंधित पक्षों द्वारा उपलब्ध कराए गए पैन की जांच के लिए PAN Verification व्यवस्था लागू करने का निर्णय भी लिया गया। कैबिनेट ने वर्ग-3 और वर्ग-4 की भूमि के पट्टेदारों एवं कब्जाधारकों को भूमिधरी अधिकार प्रदान करने से जुड़े प्रस्तावों को मंजूरी दी। इसमें नैनीताल जिले की नगर पंचायत लालकुआं के संबंधित पट्टेदारों एवं कब्जाधारकों के साथ देहरादून के परगना डोईवाला-रिस्पना क्षेत्र में वर्ग-4 की भूमि के विनियमितीकरण का प्रस्ताव शामिल है। संबंधित भूमि का विनियमितीकरण एक वर्ष के लिए वर्ष 2004 के सर्किल रेट के आधार पर किया जाएगा। इसके बाद प्रचलित सर्किल रेट लागू होगा।
वन भूमि हस्तांतरण की प्रक्रिया को तकनीकी रूप से मजबूत करने के लिए नोडल अधिकारी, वन संरक्षण के कार्यालय में परियोजना प्रबंधन इकाई यानी पीएमयू गठित करने और छह पदों को मंजूरी दी गई। वन विभाग के विभागाध्यक्ष से जुड़ी व्यवस्था में भी बदलाव किया गया है। मुख्य वन संरक्षक कुमाऊं और मुख्य वन संरक्षक गढ़वाल को विभागाध्यक्ष घोषित किए जाने का निर्णय लिया गया है। मंत्रिमंडल ने 1873 के उत्तरी भारत नहर एवं जल निकास अधिनियम को निरस्त करने और उत्तराखंड की भौगोलिक परिस्थितियों के अनुरूप उत्तराखंड सिंचाई एवं जल निकासी विधेयक-2026 को विधानसभा में पेश करने को मंजूरी दी। छठे राज्य वित्त आयोग की ओर से पंचायतीराज संस्थाओं और शहरी स्थानीय निकायों के संबंध में प्रस्तुत रिपोर्ट को आगामी विधानसभा सत्र में रखने की मंजूरी दी गई। आयोग ने वर्ष 2026-27 से 2030-31 तक की अवधि के लिए राज्य के शुद्ध कर राजस्व से स्थानीय निकायों को होने वाले अंतरण सहित वित्तीय और प्रशासनिक व्यवस्थाओं पर सिफारिशें दी हैं। इसके साथ ही उत्तराखंड राजकोषीय उत्तरदायित्व एवं बजट प्रबंधन संशोधन विधेयक-2026 को भी कैबिनेट की मंजूरी मिली। राज्य कर्मचारियों की आचरण संशोधन नियमावली-2026 को मंजूरी देकर चल-अचल और बहुमूल्य संपत्तियों से जुड़े प्रावधानों को मौजूदा परिस्थितियों के अनुरूप अद्यतन करने का निर्णय लिया गया। मुख्यमंत्री धामी ने कहा कि सीमांत क्षेत्र केवल राज्य की भौगोलिक सीमा नहीं, बल्कि देश की सुरक्षा, संस्कृति और विकास की महत्वपूर्ण कड़ी हैं। उन्होंने कहा कि सीमांत क्षेत्रों को विकास की मुख्यधारा से जोड़ने के लिए आधारभूत सुविधाओं, रोजगार, पर्यटन और कनेक्टिविटी को मजबूत किया जा रहा है। बनबसा में कैबिनेट बैठक के दौरान मुख्यमंत्री और मंत्रिमंडल के सदस्यों को चंपावत की लोक परंपरा से जुड़ी ‘फर्रा/छन्तोली’ भी भेंट की गई। यह देवीधुरा की प्रसिद्ध बग्वाल परंपरा में इस्तेमाल होने वाली पारंपरिक ढाल है, जो बांस या रिंगाल की खपच्चियों से तैयार की जाती है। बनबसा की बैठक ने जहां सीमांत क्षेत्र में शासन की मौजूदगी का संदेश दिया, वहीं दर्जनों फैसलों ने सरकार की प्रशासनिक और विकास संबंधी प्राथमिकताओं को सामने रखा। अब इन निर्णयों की वास्तविक प्रभावशीलता इस बात से तय होगी कि कैबिनेट के फैसले जमीन पर कितनी तेजी से लागू होते हैं और उनका लाभ प्रदेश के दूरस्थ क्षेत्रों तक किस स्तर तक पहुंचता है।

