गुंडा एक्ट और सीआरपीसी के मामलों का भी होगा त्वरित निपटारा, उत्तराखंड के सभी 13 जिलों में राजस्व लोक अदालत सक्रिय

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देहरादून। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने शुक्रवार को न्याय व्यवस्था को आमजन के द्वार तक पहुंचाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए राजस्व लोक अदालत का शुभारंभ किया। इस दौरान सीएम धामी ने कहा कि राज्य सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता आम जनमानस को समयबद्ध और सुलभ न्याय उपलब्ध कराना है। उन्होंने इसे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास और सबका प्रयास’ मंत्र का विस्तार बताया। मुख्यमंत्री ने कहा कि राजस्व संबंधी विवाद केवल कागजी प्रक्रिया नहीं होते, बल्कि इनके पीछे किसानों की भूमि, परिवारों की आजीविका और व्यक्तियों का आत्मसम्मान जुड़ा होता है। ऐसे में लंबित राजस्व मामलों का त्वरित समाधान जरूरी है। उन्होंने बताया कि प्रदेश में वर्तमान में 400 से अधिक राजस्व न्यायालय कार्यरत हैं, जिनमें लगभग 50 हजार से ज्यादा प्रकरण लंबित पड़े हैं। इन समस्याओं के समाधान के लिए राज्य सरकार ने ‘सरलीकरण, समाधान, निस्तारीकरण एवं संतुष्टि’ के मूल मंत्र के साथ राजस्व लोक अदालत की पहल शुरू की है। इस लोक अदालत का आयोजन प्रदेश के सभी 13 जिलों में 210 स्थानों पर एक साथ किया जा रहा है। इसमें कुल 6,933 मामलों का त्वरित निस्तारण किया जाएगा। भूमि विवादों के अलावा आबकारी, खाद्य, स्टाम्प, सरफेसी एक्ट, गुंडा एक्ट, सीआरपीसी, विद्युत अधिनियम, वरिष्ठ नागरिक अधिनियम और रेंट कंट्रोल एक्ट से संबंधित मामलों का भी पारदर्शी तरीके से निस्तारण किया जाएगा।

सीएम धामी ने कहा कि राज्य सरकार ‘मिनिमम गवर्नमेंट, मैक्सिमम गवर्नेंस’ के विजन के अनुरूप प्रशासनिक प्रक्रियाओं को सरल और पारदर्शी बनाने के लिए लगातार प्रयासरत है। इसी क्रम में राजस्व न्यायालयों की कार्यप्रणाली को ऑनलाइन करने के लिए रेवेन्यू कोर्ट केस मैनेजमेंट सिस्टम पोर्टल विकसित किया गया है। इसके माध्यम से नागरिक घर बैठे अपने मामले दर्ज कर सकते हैं और उनकी स्थिति की जानकारी भी ले सकते हैं। बैठक के दौरान मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को सख्त निर्देश दिए कि अविवादित विरासत के मामलों में भू-स्वामी की मृत्यु के बाद निर्धारित समयसीमा के भीतर नामांतरण सुनिश्चित किया जाए। उन्होंने सुझाव दिया कि मृतक की तेहरवीं या पीपलपानी तक वारिसों के नाम नामांतरण की प्रक्रिया पूरी कर नई खतौनी परिवार को उपलब्ध कराई जाए। साथ ही विवादित भूमि की पैमाइश और कब्जे से संबंधित मामलों को एक माह के अंदर निस्तारित करने के निर्देश दिए गए। पारदर्शिता और निष्पक्षता को लोक अदालत की प्रमुख विशेषता बताते हुए सीएम धामी ने कहा कि सभी पक्षों को सुनकर संवेदनशीलता के साथ न्याय किया जाएगा। उन्होंने डिजिटल इंडिया के माध्यम से आमजन तक सेवाओं की पहुंच सुनिश्चित करने पर बल दिया। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट कहा कि राज्य सरकार ‘विकल्प रहित संकल्प’ के साथ प्रदेश के प्रत्येक नागरिक को समयबद्ध और न्यायपूर्ण न्याय प्रदान करने के लिए प्रतिबद्ध है तथा ऐसे प्रयास भविष्य में भी जारी रहेंगे। मुख्य सचिव आनंद बर्धन ने बैठक में कहा कि मुख्यमंत्री द्वारा दिए गए दिशा-निर्देशों के अनुसार राजस्व वादों का तेजी से निस्तारण किया जाएगा। उन्होंने बताया कि जितना भी बैकलॉग है, उसे युद्ध स्तर पर साफ किया जाएगा। भूमि से जुड़े विवादों को प्राथमिकता देते हुए सभी पेंडिंग प्रकरणों का निस्तारण सुनिश्चित किया जाएगा। यह पहल न केवल लंबित मामलों के बोझ को कम करेगी, बल्कि आम नागरिकों को न्याय मिलने की प्रक्रिया को तेज और विश्वसनीय भी बनाएगी। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर यह लोक अदालत सफल रही तो भविष्य में अन्य विभागों में भी ऐसी पहल शुरू की जा सकती है। राजस्व लोक अदालत की इस मुहिम से प्रदेश के किसान, भूमि मालिक और आमजन में सरकार के प्रति विश्वास बढ़ने की उम्मीद है।