देहरादून। उत्तराखंड में शिक्षा व्यवस्था को आधुनिक और तकनीक आधारित बनाने की दिशा में धामी सरकार बड़ा कदम उठाने जा रही है। राज्य सरकार 54 हजार शिक्षकों को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) से लैस करने के लिए सतत व्यावसायिक विकास (सीपीडी) कार्यक्रम विकसित करेगी। इसका उद्देश्य उन्नत डिजिटल तकनीकों को कक्षा शिक्षण से जोड़ते हुए छात्रों के अधिगम परिणामों में सुधार लाना है। एससीईआरटी उत्तराखंड के अनुसार भविष्य की शिक्षा प्रणाली में एआई की भूमिका तेजी से बढ़ रही है। इसे ध्यान में रखते हुए राज्य स्तर पर एक समग्र रणनीति तैयार की जा रही है। शिक्षकों को डिजिटल प्रशिक्षण मॉड्यूल, ऑनलाइन प्लेटफॉर्म और इंटरैक्टिव टूल्स के माध्यम से प्रशिक्षित किया जाएगा। प्रशिक्षण में एआई के बुनियादी सिद्धांत, डेटा आधारित शिक्षण, पर्सनलाइज्ड लर्निंग और मूल्यांकन विश्लेषण जैसे विषय शामिल होंगे।
एससीईआरटी के एआई संकाय के वरिष्ठ शिक्षक रमेश बडोनी ने बताया कि हाल ही में नई दिल्ली में आयोजित राष्ट्रीय स्तर के एआई कार्यक्रम में सामने आई चुनौतियों और सुझावों के आधार पर राज्य में यह पहल लागू की जाएगी। एआई आधारित शिक्षण उपकरणों का चरणबद्ध परीक्षण किया जाएगा और सफल मॉडलों को राज्यभर में लागू किया जाएगा। साथ ही राष्ट्रीय एआई ढांचे के अनुरूप राज्य की आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए विशेष कार्ययोजना तैयार की जाएगी। राज्य के 13,825 राजकीय विद्यालयों में एआई के उपयोग से शिक्षण प्रक्रिया अधिक प्रभावी और परिणामोन्मुख बनने की उम्मीद है। इससे शिक्षकों का कार्यभार संतुलित होगा और छात्रों की सीखने की गति व समझ के स्तर के अनुसार अध्ययन सामग्री उपलब्ध कराई जा सकेगी। आने वाले समय में डिजिटल कक्षाएं, स्मार्ट कंटेंट और डेटा आधारित निर्णय प्रणाली को भी बढ़ावा दिया जाएगा। भारत मंडपम में आयोजित ‘भारत बोधन एआई कॉन्क्लेव 2026’ में भाग लेने वाली उत्तराखंड अकादमी शोध एवं प्रशिक्षण की निदेशक बंदना गर्ब्याल ने बताया कि देश की एआई नीति को समावेशी, इंटरऑपरेबल और आत्मनिर्भर बनाने पर जोर दिया गया है। एआई को शिक्षकों के सशक्तिकरण का प्रमुख माध्यम बनाने का संकल्प भी लिया गया। उन्होंने बताया कि राज्य में चल रहे विभिन्न डिजिटल प्रशिक्षण कार्यक्रमों के तहत अब तक 54 हजार में से 49 हजार शिक्षक प्रशिक्षण प्राप्त कर चुके हैं। आगामी सीपीडी कार्यक्रम के माध्यम से आधारभूत साक्षरता, अनुकूलन आधारित शिक्षण, बहुभाषी प्लेटफॉर्म और उन्नत मूल्यांकन प्रणालियों को बढ़ावा दिया जाएगा। इस पहल से उत्तराखंड के छात्रों को गुणवत्तापूर्ण और भविष्य उन्मुख शिक्षा उपलब्ध कराने की दिशा में महत्वपूर्ण परिवर्तन की उम्मीद है।

