माइन सर्वेयर सर्टिफिकेट सेरेमनी 2026: उद्योगों की चुनौतियों का सामना करने के लिए तैयार हुए हुनरमंद जांबाज

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धनबाद। देश के प्रतिष्ठित तकनीकी संस्थान आईआईटी-आईएसएम (IIT-ISM) धनबाद ने देश के माइनिंग सेक्टर को नई ऊंचाई देने और युवाओं को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में एक और बड़ा मुकाम हासिल किया है। संस्थान के माइनिंग इंजीनियरिंग विभाग द्वारा प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना (पीएमकेवीवाई 4.0) के अंतर्गत आयोजित 'असिस्टेंट माइन सर्वेयर' प्रशिक्षण कार्यक्रम गुरुवार को सफलतापूर्वक संपन्न हो गया। संस्थान के टेक्समिन सेमिनार हॉल में आयोजित एक भव्य 'स्किल सर्टिफिकेट डिस्ट्रीब्यूशन सेरेमनी-2026' के दौरान प्रशिक्षण पूरा करने वाले 147 प्रतिभागियों को मुख्य अतिथि और संस्थान के उपनिदेशक प्रो. धीरज कुमार द्वारा प्रमाण पत्र प्रदान कर सम्मानित किया गया। यह विशेष रोजगार-परक कार्यक्रम कौशल विकास एवं उद्यमिता मंत्रालय तथा नेशनल स्किल डेवलपमेंट कॉरपोरेशन (एनएसडीसी) के संयुक्त सहयोग से संचालित किया गया था।

समारोह के दौरान कुल 147 लोगों को प्रमाणपत्र सौंपे गए। इनमें तीन महीने का कड़ा और गहन तकनीकी प्रशिक्षण पूरा करने वाले 85 होनहार प्रशिक्षु शामिल हैं, जबकि इस कार्यक्रम को विजनरी बनाने वाले 62 कुशल प्रशिक्षकों (ट्रेनर्स) को भी सम्मानित किया गया। तीन महीने के इस विशेष कोर्स के दौरान आईआईटी (आईएसएम) के वरिष्ठ शिक्षकों और तकनीकी अधिकारियों के साथ-साथ भारत कोकिंग कोल लिमिटेड (बीसीसीएल), भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई) और विभिन्न प्रतिष्ठित औद्योगिक संस्थानों के शीर्ष विशेषज्ञों ने आकर प्रतिभागियों को व्यावहारिक, वित्तीय और आधुनिक तकनीकी प्रशिक्षण दिया। इस कार्यक्रम की सबसे बड़ी सफलता इसके प्लेसमेंट के रूप में सामने आई है। कोर्स समन्वयक डॉ. सुनील कुमार ने मंच से गौरवशाली जानकारी साझा करते हुए बताया कि प्रशिक्षण कार्यक्रम में केवल थ्योरी ही नहीं, बल्कि फील्ड प्रैक्टिकल और उद्योगों के साथ सीधा जुड़ाव सुनिश्चित किया गया था। यही वजह है कि हाल ही में आयोजित हुए कैंपस प्लेसमेंट अभियान के दौरान 32 प्रशिक्षुओं को देश की विभिन्न जानी-मानी कंपनियों में सीधे रोजगार मिल गया है। यह शानदार प्लेसमेंट रिकॉर्ड प्रशिक्षण की उच्च गुणवत्ता और बाजार में कुशल माइन सर्वेयर्स की भारी मांग का सीधा प्रमाण है। माइनिंग इंजीनियरिंग विभागाध्यक्ष प्रो. बी.एस. चौधरी ने बताया कि प्रशिक्षण पाठ्यक्रम का खाका इस तरह तैयार किया गया था, जिससे ग्रामीण व शहरी युवाओं को आधुनिक माइनिंग तकनीकों के साथ-साथ उद्योगों की वास्तविक कार्यप्रणाली (रियल-टाइम वर्किंग) का अनुभव मिल सके। संस्थान का मुख्य उद्देश्य ऐसे दक्ष और हुनरमंद माइन सर्वेयर तैयार करना है, जो माइनिंग क्षेत्र की चुनौतियों का सामना ऑन-फील्ड सीधे कर सकें। प्रमाणपत्र पाकर खिले चेहरों के बीच प्रशिक्षु दीक्षा कुमारी ने अपना अनुभव साझा किया। दीक्षा ने भावुक और गर्वित होते हुए कहा, "आईआईटी (आईएसएम) में मिला यह तीन महीने का प्रशिक्षण मेरे तकनीकी कौशल और आत्मविश्वास को नई मजबूती देने वाला साबित हुआ है। यहां की बेहतरीन ट्रेनिंग की बदौलत ही कोर्स पूरा होते ही मुझे कोलकाता स्थित एक प्रतिष्ठित कंपनी में नौकरी का शानदार अवसर मिल गया है।" इस गरिमामयी समारोह में डीन (इनोवेशन, इन्क्यूबेशन एंड एंटरप्रेन्योरशिप) प्रो. आलोक कुमार दास, संस्थान के शिक्षक, तकनीकी अधिकारी, माइनिंग उद्योग जगत के कई प्रतिनिधि, ट्रेनर्स, छात्र और उनके गौरवान्वित अभिभावक भारी संख्या में मौजूद रहे।