यूपी बसपा समाचार: बड़े झटके के बाद पार्टी के पास नहीं बचा कोई विधायक

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लखनऊ। बहुजन समाज पार्टी (बसपा) को उत्तर प्रदेश की राजनीति में बड़ा झटका लगा है। पार्टी के प्रदेश विधानसभा में एकमात्र विधायक उमा शंकर सिंह का बुधवार देर रात लंबी बीमारी के बाद 55 वर्ष की आयु में निधन हो गया। उनके निधन के साथ ही उत्तर प्रदेश विधानसभा में बसपा का प्रतिनिधित्व पूरी तरह समाप्त हो गया है। यह केवल एक विधायक की मृत्यु नहीं, बल्कि पूर्वांचल की राजनीति के एक प्रभावशाली चेहरे और बसपा के मजबूत जनाधार वाले नेता का अवसान भी माना जा रहा है। उमा शंकर सिंह बलिया जिले की रसड़ा विधानसभा सीट से विधायक थे। वर्ष 2022 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में जब बसपा पूरे प्रदेश में लगभग पूरी तरह सिमट गई थी, तब रसड़ा सीट से उनकी जीत ने पार्टी की साख बचाई थी। वह विधानसभा में बसपा के अकेले विधायक थे और विपक्ष के रूप में पार्टी की आवाज बने हुए थे। अब उनके निधन के बाद विधानसभा में बसपा का कोई भी सदस्य नहीं बचा है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि उमा शंकर सिंह की जीत केवल बसपा के चुनाव चिह्न की वजह से नहीं, बल्कि उनके मजबूत व्यक्तिगत जनाधार और क्षेत्र में लंबे समय से किए गए जनसंपर्क का परिणाम थी। ऐसे समय में जब बसपा का संगठन लगातार कमजोर हो रहा था और भाजपा का प्रभाव बढ़ रहा था, तब भी उन्होंने रसड़ा सीट पर अपनी पकड़ बनाए रखी। उनकी राजनीतिक यात्रा इस बात का उदाहरण मानी जाती है कि कई बार व्यक्ति स्वयं एक मजबूत राजनीतिक संस्था बन जाता है। यही कारण था कि विपरीत राजनीतिक परिस्थितियों में भी वे जनता का विश्वास जीतने में सफल रहे। उमा शंकर सिंह के निधन के बाद बसपा अब उत्तर प्रदेश विधानसभा में शून्य पर पहुंच गई है। इससे पहले वर्ष 2024 में विधान परिषद में भी पार्टी का प्रतिनिधित्व समाप्त हो गया था, जब बसपा के एकमात्र विधान परिषद सदस्य भीमराव अंबेडकर का कार्यकाल पूरा हो गया। इसके बाद पार्टी किसी भी सदस्य को विधान परिषद में नहीं भेज सकी। वर्तमान स्थिति यह है कि उत्तर प्रदेश विधानसभा और विधान परिषद, दोनों सदनों में बसपा का कोई प्रतिनिधि नहीं है। ऐसे में प्रदेश की राजनीति में पार्टी की संस्थागत उपस्थिति लगभग समाप्त हो चुकी है।

लोकसभा में पहले ही नहीं है कोई सांसद
बसपा को वर्ष 2024 के लोकसभा चुनाव में भी निराशा हाथ लगी थी। पार्टी एक भी सीट जीतने में सफल नहीं हो सकी थी। वर्तमान में संसद में बसपा का प्रतिनिधित्व केवल राज्यसभा के माध्यम से है, जहां पार्टी के राष्ट्रीय समन्वयक रामजी गौतम एकमात्र सांसद हैं। हालांकि, रामजी गौतम का राज्यसभा कार्यकाल 25 नवंबर 2026 को समाप्त हो रहा है। उत्तर प्रदेश से राज्यसभा के जिन 10 सदस्यों का कार्यकाल इस वर्ष पूरा होगा, उनमें भाजपा के आठ, समाजवादी पार्टी का एक और बसपा के रामजी गौतम शामिल हैं। मौजूदा विधानसभा में संख्या बल को देखते हुए बसपा के लिए दोबारा राज्यसभा सीट हासिल करना बेहद कठिन माना जा रहा है। यदि ऐसा होता है तो नवंबर 2026 के बाद संसद के दोनों सदनों, 'लोकसभा और राज्यसभा' में भी बसपा का कोई प्रतिनिधि नहीं रहेगा।

कांशीराम और मायावती की पार्टी के सामने अस्तित्व की चुनौती
बहुजन समाज पार्टी की स्थापना वर्ष 1984 में कांशीराम ने की थी। 1989 के चुनावों में पार्टी को पहली बड़ी राजनीतिक सफलता मिली और धीरे-धीरे बसपा उत्तर प्रदेश की सबसे प्रभावशाली राजनीतिक ताकतों में शामिल हो गई। पार्टी संस्थापक कांशीराम के नेतृत्व और बाद में मायावती के नेतृत्व में बसपा चार बार उत्तर प्रदेश की सत्ता तक पहुंची। एक समय ऐसा था जब बसपा विधानसभा, विधान परिषद, लोकसभा और राज्यसभा—सभी सदनों में मजबूत उपस्थिति रखती थी। लेकिन पिछले कुछ वर्षों में लगातार चुनावी गिरावट के कारण पार्टी का जनाधार कमजोर होता गया। 2022 के विधानसभा चुनाव में केवल एक सीट, 2024 के लोकसभा चुनाव में शून्य सीट और अब एकमात्र विधायक के निधन ने पार्टी के सामने गंभीर राजनीतिक संकट खड़ा कर दिया है।