भीष्म थिंक टैंक समाचार: उत्तराखंड की अंतरराष्ट्रीय सीमाओं की सुरक्षा के लिए विशेषज्ञों का प्लान तैयार

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देहरादून। बदलते वैश्विक परिदृश्य और भारत की सीमाओं पर उभरती चुनौतियों के बीच शुक्रवार को उत्तराखंड के राजभवन (लोक भवन) में राष्ट्रीय सुरक्षा को लेकर एक बेहद महत्वपूर्ण और उच्च स्तरीय बैठक आयोजित की गई। राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल (से.नि.) गुरमीत सिंह की अध्यक्षता में भारत हिमालयन इंटरनेशनल स्ट्रेटेजिक मंच थिंक टैंक के शीर्ष सदस्यों के साथ देश की आंतरिक, बाहरी और वैश्विक सुरक्षा से जुड़े समसामयिक विषयों पर गहन मंथन हुआ। इस सामरिक महामंथन में भारतीय सेना के भूतपूर्व सीडीएस (चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ) जनरल अनिल चौहान सहित देश के कई सबसे अनुभवी पूर्व सैन्य कमांडर, रणनीतिकार और विषय विशेषज्ञ शामिल हुए। बैठक में सीमा प्रबंधन , सामरिक चुनौतियों और अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा परिदृश्य को लेकर बेहद संवेदनशील और दूरगामी रणनीतियों पर विस्तृत विचार-विमर्श किया गया। बैठक के दौरान थिंक टैंक से जुड़े पूर्व सैन्य अधिकारियों और सामरिक विशेषज्ञों ने अपने वर्षों के ऑन-फील्ड अनुभव और हालिया वैश्विक अध्ययनों के आधार पर देश की सुरक्षा व्यवस्था को और अधिक आधुनिक व सुदृढ़ बनाने के लिए कई महत्वपूर्ण सुझाव राज्यपाल के समक्ष प्रस्तुत किए।

विशेषज्ञों के सुझावों की सराहना करते हुए राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह ने कहा राष्ट्रीय सुरक्षा जैसे देश के सबसे संवेदनशील और महत्वपूर्ण विषयों पर विशेषज्ञों के साथ इस प्रकार का संवाद अत्यंत उपयोगी होता है। सैन्य दिग्गजों का यह अनुभव हमारी नीतिगत सोच को एक व्यापक और नई दृष्टि प्रदान करता है। इस प्रकार के विचार-विमर्श और रणनीतिक सुझाव देश की रक्षा तैयारियों को और अधिक अभेद्य व मजबूत बनाने में मील का पत्थर सिद्ध होंगे। बैठक के एजेंडे में विशेष रूप से हिमालयी क्षेत्रों की सुरक्षा और सीमावर्ती बुनियादी ढांचे के विकास पर चर्चा की गई। बदलते वैश्विक सुरक्षा समीकरणों, जैसे आधुनिक तकनीकी युद्ध और खुफिया तंत्र को मजबूत करने को लेकर भी विचार साझा किए गए। 'भीष्म' थिंक टैंक के विशेषज्ञों ने रेखांकित किया कि देश की सीमाओं को सुरक्षित रखने के लिए अग्रिम चौकियों के प्रबंधन के साथ-साथ स्थानीय आबादी का पलायन रोकना और उनका विकास करना भी राष्ट्रीय सुरक्षा का एक अभिन्न हिस्सा है। राजभवन में आयोजित इस रणनीतिक बैठक की गंभीरता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि इसमें जल, थल और नभ तीनों सेनाओं के पूर्व शीर्ष अधिकारियों सहित प्रतिष्ठित शिक्षाविदों ने अपनी उपस्थिति दर्ज कराई। बैठक में मुख्य रूप से शामिल रहे। सैन्य अधिकारियों के अलावा देश के जाने-माने प्रशासनिक और तकनीकी विशेषज्ञ जैसे पूर्व आईएएस संजीव चोपड़ा, प्रो. दुर्गेश पंत, अमनप्रीत सिंह, डॉ. राज्य लक्ष्मी और रवि गड़ीराजू सहित कई अन्य बुद्धिजीवियों ने भी चर्चा में भाग लिया और अपने बहुमूल्य इनपुट दिए। प्रशासनिक और सैन्य गलियारों में इस बैठक को बेहद खास माना जा रहा है। उत्तराखंड जैसे सामरिक रूप से संवेदनशील सीमावर्ती राज्य के राजभवन में इस स्तर का रक्षा विमर्श होना यह दर्शाता है कि केंद्र और राज्य सरकारें सीमाओं की सुरक्षा को लेकर हर स्तर पर मुस्तैद हैं। थिंक टैंक द्वारा तैयार किए गए इन सुझावों के निष्कर्षों को आगे राष्ट्रीय स्तर की सुरक्षा नीतियों और रक्षा मंत्रालय के साथ साझा किए जाने की उम्मीद है, ताकि देश की सीमाओं को सुरक्षित और नागरिकों को भयमुक्त रखा जा सके।